अमलाई। बटुरा-बिछिया और आसपास के इलाकों में इन दिनों 52 परी यानी ताश के जुए की चर्चा जोरों पर है। इलाके में चल रही चर्चाओं और स्थानीय सूत्रों की मानें तो पिछले करीब एक महीने से जुल्ली और अशोक नाम के दो लोगों के द्वारा जगह-जगह जुए के फड़ जमाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि फड़ एक ही जगह पर नहीं लगता। आज यहां तो कल वहां, पुलिस की नजर से बचने के लिए ठिकाने बदल दिए जाते हैं। कभी बटुरा तो कभी बिछिया और आसपास के सुनसान एवं जंगल वाले इलाकों में जुआ बैठने की चर्चा है।
बुढार से बिजुरी तक के खिलाड़ी पहुंचने की चर्चा
इस कथित जुए के खेल में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बुढार, धनपुरी, शहडोल, कोतमा, बिजुरी और अनूपपुर जैसे इलाकों से भी खिलाड़ी पहुंचने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक बाहर से आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी पूरा इंतजाम रहता है। मुख्य सड़क से आगे जहां वाहन पहुंचते हैं, वहां से कथित रूप से कुछ लोग उन्हें आगे जंगल या सुनसान जगह तक पहुंचाते हैं। यानी खिलाड़ी कहां से आ रहा है, किस रास्ते से जा रहा है और फड़ तक कैसे पहुंचना है—इसकी जानकारी पहले से तय होने की बात कही जा रही है।
तिराहे-चौराहे पर निगरानी, पुलिस से पहले पहुंचती है खबर!
इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात कथित निगरानी व्यवस्था है। चर्चा है कि रास्ते में तिराहे-चौराहे और गली-मोहल्लों में लोग नजर रखने के लिए खड़े रहते हैं।
कोई नया चेहरा दिखाई दिया या पुलिस की गाड़ी नजर आई तो खबर फड़ तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता। यही वजह है कि स्थानीय लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर पुलिस से पहले जुआ संचालकों को सूचना कैसे मिल जाती है?
क्या इनका अपना कोई मजबूत नेटवर्क है?
क्या कहीं से अंदर की खबर पहुंचती है?
या फिर किसी बड़े आदमी का हाथ इनके सिर पर है?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
पास में थाना, फिर भी जुआ बेखौफ!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इलाके में जुए के फड़ की लगातार चर्चा हो रही है, वहां से अमलाई थाना भी ज्यादा दूर नहीं है। इसके बावजूद अगर पिछले एक महीने से यह खेल चलने की बात सामने आ रही है तो पुलिस की निगरानी और मुखबिर तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोगों का कहना है कि अगर जुआ नहीं चल रहा है तो पुलिस खुलकर जांच करे और स्थिति साफ करे। वहीं अगर वास्तव में 52 परी का खेल चल रहा है तो सिर्फ छोटे खिलाड़ियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे खेल के असली संचालकों तक पहुंचना जरूरी है।
जुल्ली और अशोक की जोड़ी की चर्चा पूरे इलाके में
बटुरा-बिछिया क्षेत्र में इन दिनों जुल्ली और अशोक के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इनके द्वारा जगह बदल-बदलकर जुए का संचालन कराया जाता है और खिलाड़ियों को ठिकाने तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग लोगों का इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि यह सभी बातें स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों पर आधारित हैं। पुलिस की जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
क्या किसी का संरक्षण मिला हुआ है?
अब इलाके में सबसे बड़ा सवाल यही घूम रहा है कि अगर इतने बड़े स्तर पर जुए का खेल चलने की बात सही है तो आखिर इसके पीछे कौन है?
क्या कोई राजनीतिक संरक्षण है?
क्या कोई प्रशासनिक संरक्षण है?
या फिर पुलिस तंत्र में ही कोई ऐसा व्यक्ति है जो पहले से सूचना पहुंचा देता है?
इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है, क्योंकि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सिर्फ जुआ खेलने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी होगी।
एक व्यक्ति के जिला बदर होने की भी चर्चा
स्थानीय सूत्रों द्वारा यह भी बताया जा रहा है कि कथित रूप से इस नेटवर्क से जुड़े लोगों में से एक व्यक्ति के खिलाफ पूर्व में जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है। हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह जानकारी सही है तो पुलिस-प्रशासन को पुराने रिकॉर्ड की जांच कर यह भी देखना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति वर्तमान में किस तरह और किन गतिविधियों में सक्रिय है।
अब फड़ पर पुलिस की नजर कब पड़ेगी?
बटुरा-बिछिया में 52 परी के कथित खेल को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। बाहर से खिलाड़ियों के आने की बात कही जा रही है, जंगल तक पहुंचाने के लिए कथित व्यवस्था की चर्चा है और रास्तों पर निगरानी रखने वाले लोगों की भी बातें सामने आ रही हैं।
बटुरा-बिछिया में जुल्ली-अशोक का 52 परी का खेल!दिन बदलते ही ठिकाना बदल जाता है, सड़क से जंगल तक पहुंचते हैं खिलाड़ी; अमलाई पुलिस की नजर से कैसे बच रहा पूरा खेल?
