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जेब में पुड़िया, जुबां पर ज्ञान: खुद दिन-रात तंबाकू चबाने वाले ‘माननीयों’ ने युवाओं को बांटी नशामुक्त जीवन की सीख

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कहते हैं कि ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’, यानी दूसरों को नसीहत देना दुनिया का सबसे आसान काम है। कुछ ऐसा ही अनोखा और पाखंड से लबरेज नजारा अनूपपुर के जिला चिकित्सालय में देखने को मिला। जहाँ विश्व तंबाकू निषेध दिवस के पवित्र मंच पर वो लोग मुख्य वक्ता बनकर ज्ञान की गंगा बहा रहे थे, जिनकी अपनी सुबह और रात बिना तंबाकू, जर्दे या गुटखे के पूरी नहीं होती। मंच पर बैठे इन ‘तंबाकू-प्रेमियों’ ने जब युवाओं से नशामुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया, तो चिकित्सालय की दीवारें भी मुस्कुरा उठीं।अस्पताल परिसर में ‘दोहरे चरित्र’ का भव्य आयोजनभारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, अनूपपुर के तत्वावधान में जिला चिकित्सालय परिसर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जनसामान्य को तंबाकू एवं उससे निर्मित उत्पादों के जानलेवा दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से सजे इस मंच पर अजीबोगरीब स्थिति तब निर्मित हो गई, जब कार्यक्रम की कमान ही उन हाथों में थी जो दिन-रात तंबाकू रगड़ने में माहिर हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों की इस महफिल में तंबाकू मुक्त समाज की परिकल्पना तो की गई, लेकिन मंच पर बैठे अतिथियों के चेहरों पर इसका कोई असर नहीं दिखा। मुंह में दबा जर्दा और युवाओं को नशामुक्त रहने की सीखगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने तंबाकू के सेवन से होने वाले पारिवारिक और सामाजिक नुकसान पर ऐसी गहरी चिंता व्यक्त की, मानो वे खुद इस लत से कोसों दूर हों। वक्ताओं के हाव-भाव और उनकी जेबों में दबे हुए गुटखे के पाउच साफ गवाही दे रहे थे कि यह आयोजन सिर्फ सरकारी खानापूर्ति और अखबारी सुर्खियां बटोरने के लिए किया जा रहा है। युवाओं को नशे से दूर रहने की नसीहत देने वाले इन खुदघोषित मार्गदर्शकों की कथनी और करनी का अंतर कार्यक्रम में साफ उजागर हो रहा था।संघ के लोगों का भी रहा ‘चमत्कारी’ संबोधनइस अवसर पर उपस्थित कई लोगों ने युवाओं से नशामुक्त जीवन अपनाने का पुरजोर आह्वान किया। हैरानी की बात यह थी कि दिन-रात तंबाकू के आदी रहे लोग स्वयं गंभीर लहजे में कहा कि नशे की प्रवृत्ति न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नष्ट करती है, बल्कि पूरे परिवार को गर्त में धकेल देती है। उनके इस भाषण के दौरान पंडाल में मौजूद कुछ लोग दबी जुबान में यह कहते सुने गए कि काश यह ज्ञान वक्ता महोदय खुद के जीवन पर भी लागू कर पाते।रेड क्रॉस सभापति का कैंसर पर ‘ज्ञानवर्धक’ भाषणवहीं, रेड क्रॉस सोसायटी के सभापति ने तंबाकू जनित गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर और हृदय रोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. सोनी, जो स्वयं चौबीसों घंटे तंबाकू के किसी न किसी रूप का सेवन करने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने लोगों से इसे तत्काल त्यागने की भावुक अपील की। डॉक्टरों और मरीजों के बीच तंबाकू की पुड़िया के लिए मशहूर सभापति महोदय का यह रूप देखकर वहां उपस्थित कई जूनियर डॉक्टर अपनी हंसी नहीं रोक पाए। गणमान्य नागरिकों की ‘मौन’ सहभागिताइस पाखंड भरे कार्यक्रम में डॉ. जनक सारिवान, डॉ. शिवेंद्र द्विवेदी, कमलाकर गौतम सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इनमें से अधिकांश लोग वो थे जो समाज में बड़े पद पर तो हैं, लेकिन तंबाकू की लत के सामने बेबस हैं। इन सभी गणमान्य जनों ने मंच से दी जा रही नसीहतों पर खूब तालियां बजाईं और समाज में इसके खिलाफ सघन जन-जागरूकता अभियान चलाने का दिखावटी संकल्प भी लिया।मंच के पीछे खुल गई पाखंड की पोलगोष्ठी के दौरान मंच पर जितनी गंभीरता दिखाई जा रही थी, मंच के पीछे का नजारा उसके ठीक उलट था। कार्यक्रम के बीच-बीच में कई अतिथि और आयोजक ‘गले को तर’ करने और तंबाकू का स्वाद लेने के बहाने मंच से उठकर पीछे जाते दिखे। अस्पताल परिसर के कोने, पेड़ की ओट और वाशरुम के पास जमे तंबाकू के ताजे दाग इस बात का सबूत थे कि जागरूकता सिर्फ माइक और बैनर तक ही सीमित थी।. कार्यक्रम खत्म, पुड़िया चालूजैसे ही कार्यक्रम के समापन की घोषणा हुई, जागरूकता का मुखौटा तुरंत उतर गया। शपथ लेने और दिलाने वाले कई वीआईपी नागरिक चिकित्सालय परिसर से बाहर निकलते ही अपनी जेबों से तंबाकू की पुड़िया निकालते और उसे हथेली पर रगड़ते नजर आए। इस तरह जिला चिकित्सालय का यह विश्व तंबाकू निषेध दिवस केवल एक दिखावा बनकर रह गया, जहाँ उपदेश देने वाले खुद ही उस बुराई के सबसे बड़े संरक्षक बने हुए हैं।

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