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क्या मोजर बेयर ने इंसानों की सांस और किसानों की मिट्टी की कीमत तय कर दी है?” — उमंग अनिल गुप्ता राखड़ एवं कोयले से प्रदूषित पानी खिन्ना नाला के माध्यम से सोन नदी में छोड़े जाने की शिकायतों पर जताई गंभीर चिंता

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जैतहरी/अनूपपुर। मोजर बेयर से निकलने वाले राखड़ एवं कोयले से कथित रूप से प्रदूषित पानी को खिन्ना नाला के माध्यम से सोन नदी में छोड़े जाने की शिकायतों को लेकर स्थानीय नागरिकों और किसानों में चिंता एवं आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर उमंग अनिल गुप्ता ने जिला प्रशासन से तत्काल निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

उमंग अनिल गुप्ता ने कहा कि यह केवल पानी के प्रदूषण का मामला नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य, किसानों की जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि प्रदूषित पानी नदी में पहुंचता है और आगे कृषि क्षेत्रों तक इसका प्रभाव पड़ता है, तो इसका असर मिट्टी, फसलों, किसानों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, “जिस पानी से किसान अपनी फसल सींचता है, यदि वही पानी प्रदूषित हो जाए तो नुकसान केवल खेत की मिट्टी का नहीं होता, बल्कि किसान के परिवार की मेहनत, स्वास्थ्य और भविष्य पर भी पड़ता है।”

उमंग अनिल गुप्ता ने प्रशासन से सवाल करते हुए कहा कि आखिर किसकी अनुमति या लापरवाही के कारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े इतने गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग और विकास आवश्यक हैं, लेकिन विकास की कीमत आम जनता के स्वास्थ्य और किसानों की जमीन से नहीं चुकाई जा सकती।

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि मामले की तत्काल मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच कराई जाए। खिन्ना नाला, सोन नदी तथा प्रभावित क्षेत्रों के पानी और मिट्टी के नमूने वैज्ञानिक संस्थान से जांच के लिए भेजे जाएं। प्रदूषण के वास्तविक स्रोत की पहचान की जाए और यदि जांच में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि नागरिकों और किसानों के बीच व्याप्त आशंका दूर हो सके।

उमंग अनिल गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “उद्योग जरूरी हैं, विकास जरूरी है, लेकिन लोगों की जिंदगी की कीमत पर नहीं। हमारी सांसों का सौदा नहीं हो सकता, किसानों की जमीन का सौदा नहीं हो सकता और हमारी नदियों तथा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने कहा कि जनता के पानी, स्वास्थ्य और जमीन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस मामले में प्रशासन से अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस एवं पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा है।

— उमंग अनिल गुप्ता

अध्यक्ष, नगर परिषद जैतहरी
जैतहरी, जिला अनूपपुर (मध्यप्रदेश)

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