एक परिवार… एक ग़लती… चार जानें… अब सिर्फ यादें बची हैं।
अनूपपुर।
जिले में लगातार हो रही बारिश ने रविवार रात को ऐसी त्रासदी ला दी, जिसने एक पूरा परिवार ही निगल लिया। अमरकंटक रोड पर सजहा नाले में एक कार पुलिया पार करते वक्त तेज बहाव में बह गई, जिसमें पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे सवार थे। चारों की मौत हो गई।
कार चला रहे 38 वर्षीय चंद्रशेखर यादव एसईसीएल में फोरमैन के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनकी पत्नी प्रीति यादव (37) जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स थीं। उनके साथ उनके 8 वर्षीय बेटे रेयांश और 2 वर्षीय बेटी सीबी भी सवार थे। परिवार रविवार को अमरकंटक से लौट रहा था, तभी यह हादसा हुआ।
7 बजे की शाम, ज़िंदगी की आखिरी यात्रा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब 7 बजे सजहा पुल पर पानी का बहाव तेज था। कई वाहन रुक चुके थे। कुछ स्थानीय लोगों और वेयरहाउस कर्मियों ने चंद्रशेखर को पुल पार न करने की चेतावनी दी, लेकिन एक बस के पार जाने के बाद उन्होंने भी कार बढ़ा दी। तभी पुल का हिस्सा टूट गया और कार बहते पानी में समा गई।
एक-एक कर मिले शव
घटना के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। प्रीति यादव का शव घटनास्थल से करीब 5 किमी दूर रविवार रात ही मिल गया, जबकि चंद्रशेखर और दोनों बच्चों के शव सोमवार को 9 किमी के दायरे में मिले। मौत की इस खबर से पूरे अनूपपुर में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रशासन पर उठे सवाल, पटवारी व पंचायत कर्मी पर गिरी गाज
सोमवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर हर्षल पंचोली ने नाराज़गी जताते हुए ग्राम औढ़ेरा के पटवारी संजीव सिंह, पंचायत सचिव कल्याण सिंह और रोजगार सहायक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निलंबन का प्रस्ताव CEO जिला पंचायत को भेजा है।
परिवार नहीं रहा, बचे सिर्फ आंसू
इस दर्दनाक हादसे में पूरा परिवार खत्म हो गया। चंद्रशेखर यादव के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। उनकी ससुराल पक्ष इस हादसे से बदहवास है। जिला चिकित्सालय अनूपपुर में शवों को देखने पहुंचे प्रीति यादव के माता-पिता की हालत बेहद खराब थी।
मंत्री पहुंचे अस्पताल
मध्यप्रदेश कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिजनों से भेंट की और गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने विधायक निधि से 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
प्रत्यक्षदर्शी बोले: “हमने रोका था, पर…”
जसमत सिंह बंजारा, जो हादसे के वक्त वहीं मौजूद थे, ने बताया कि पहले एक कार को लोगों ने बाहर निकाला। फिर एक बस निकली। “बस के ठीक पीछे चंद्रशेखर की कार आई, उन्हें बहुत बार मना किया, लेकिन वह नहीं माने। पानी बहुत तेज था। हमारे घरों में भी घुस चुका था। हम सामान छोड़ छत पर चढ़े थे। वहीं से यह मंजर देखा





