अनूपपुर/भोपाल। रामलाल रौतेल ने अनूपपुर जिले सहित शहडोल संभाग के जनजातीय क्षेत्रों में जंगली हाथियों के लगातार बढ़ते आतंक और उससे हो रही जन-धन हानि को लेकर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर हाथियों के विचरण पर रोक लगाने, प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थायी समाधान के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है।अपने पत्र में श्री रौतेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से लगे अनूपपुर जिले में पिछले लगभग 135 दिनों से 4 जंगली हाथियों का दल लगातार सक्रिय है। पड़ोसी राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 300 हाथियों के विचरण की जानकारी भी सामने आई है, जिनमें से कुछ हाथी समय-समय पर अनूपपुर जिले में प्रवेश कर जाते हैं। इन हाथियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।फसलें बर्बाद, मकान क्षतिग्रस्त, रातभर जागने को मजबूर ग्रामीणहाथियों के दल द्वारा खेतों में घुसकर किसानों की फसलें लगातार नष्ट की जा रही हैं। कई गांवों में हाथियों ने घरों और मकानों को भी नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के डर से लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। विशेष रूप से जनजातीय बहुल गांवों में लोग अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का दल देर रात गांवों के आसपास पहुंच जाता है, जिससे लोग घरों से बाहर निकलने तक में डर महसूस कर रहे हैं। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने मशाल, ढोल और पटाखों के सहारे हाथियों को भगाने का प्रयास भी किया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी है।वर्ष 2015 से अब तक 16 लोगों की जा चुकी जानआयोग अध्यक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्ष 2015 से वर्ष 2026 तक हाथियों के हमलों में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 12 जनजातीय वर्ग के पुरुष एवं महिलाएं शामिल हैं। मृतकों में विशंभर भैना, प्रेमसिंह, जानकी बाई, मुन्नीबाई, रामचन्द्र पाव, जर्नादन सिंह, धन्नू सिंह, ज्ञानसिंह गोंड, हेमराज सिंह, रामविशाल भैना, प्रेमवती पाव और जानकी कोल सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल हैं।इन घटनाओं के कारण प्रभावित गांवों में लोगों के बीच भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से अब तक केवल जागरूकता अभियान चलाया गया है, लेकिन हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए कोई प्रभावी और स्थायी कदम नहीं उठाया गया।24 घंटे निगरानी और विशेष कार्ययोजना की मांगरामलाल रौतेल ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखे और आधुनिक तकनीक एवं संसाधनों का उपयोग कर हाथियों को रिहायशी क्षेत्रों से दूर रखने की व्यवस्था करे।उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर ऐसी विशेष कार्ययोजना तैयार करें, जिससे भविष्य में मानव और जंगली हाथियों के बीच होने वाले संघर्ष को कम किया जा सके। प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को तत्काल उचित मुआवजा देने की मांग भी उन्होंने उठाई है।हाथियों को अन्य सुरक्षित क्षेत्र में भेजने की उठाई मांगश्री रौतेल ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान में अनूपपुर जिले में विचरण कर रहे हाथियों को अन्य सुरक्षित वन क्षेत्रों में भेजने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोका जा सके। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।जिले में लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन और वन विभाग इस मामले में जल्द कोई ठोस निर्णय लेकर राहत पहुंचाएंगे।
