अनूपपुर। जिले के कोतमा क्षेत्र में प्रस्तावित अनूपपुर थर्मल पावर परियोजना (अदाणी समूह) को लेकर मझौली तथा आसपास के कई गांवों में विकास और रोजगार की नई उम्मीदें दिखाई देने लगी हैं। आगामी 24 जून को आयोजित होने वाली लोक जनसुनवाई को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसका स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र लंबे समय से बड़े औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहा था, ऐसे में अदाणी समूह की यह परियोजना स्थानीय युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।ग्रामीणों का कहना है कि कोतमा और अनूपपुर क्षेत्र के अनेक युवा रोजगार की तलाश में इंदौर, भोपाल, रायपुर, बिलासपुर, नागपुर, जबलपुर और अन्य बड़े शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। क्षेत्र में रोजगार के सीमित साधन होने के कारण पढ़े-लिखे युवाओं को भी अपनी योग्यता के अनुरूप काम नहीं मिल पाता है। ऐसे में यदि थर्मल पावर परियोजना स्थापित होती है तो निर्माण कार्य, परिवहन, मशीन संचालन, सुरक्षा सेवाओं, ठेका कार्यों, रखरखाव, खानपान, होटल व्यवसाय और अन्य सहायक गतिविधियों में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।ग्रामीणों का मानना है कि किसी भी बड़े औद्योगिक निवेश का लाभ केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके आसपास के गांवों और स्थानीय बाजारों तक भी पहुंचता है। लोगों का कहना है कि परियोजना के शुरू होने से छोटे व्यापारियों, किराना दुकानदारों, वाहन संचालकों, भवन निर्माण सामग्री विक्रेताओं, होटल संचालकों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की उम्मीदमझौली और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि यदि परियोजना क्षेत्र में आती है तो सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। ग्रामीणों का मानना है कि बड़े उद्योगों के आगमन से अक्सर संपर्क मार्गों का निर्माण, सड़कों का उन्नयन, विद्युत आपूर्ति में सुधार और स्थानीय स्तर पर विभिन्न जनसुविधाओं का विकास होता है, जिससे पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल जाती है।ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में कई गांवों में अभी भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और आधारभूत संरचना की कमी महसूस की जाती है। ऐसे में यदि परियोजना के साथ सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत विकास कार्य किए जाते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पेयजल और सामुदायिक सुविधाओं के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।जनसुनवाई को बताया लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्साग्रामीणों का कहना है कि 24 जून को प्रस्तावित लोक जनसुनवाई एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। कई ग्रामीणों ने कहा कि जनसुनवाई के माध्यम से लोग अपनी अपेक्षाएं, सुझाव और स्थानीय आवश्यकताओं को प्रशासन एवं कंपनी के समक्ष रख सकते हैं, जिससे विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।ग्रामीणों के अनुसार, जनसुनवाई किसी भी परियोजना के संबंध में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम है और इसमें अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता से क्षेत्र के भविष्य को लेकर सार्थक चर्चा हो सकती है। लोगों ने कहा कि वे चाहते हैं कि विकास योजनाओं में स्थानीय युवाओं, किसानों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा रोजगार के अवसरों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिले।युवाओं में बढ़ी रोजगार की उम्मीदक्षेत्र के युवाओं का कहना है कि बड़े उद्योगों की स्थापना से तकनीकी प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। उनका मानना है कि यदि परियोजना स्थापित होती है तो स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी और उन्हें रोजगार के लिए अन्य शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।ग्रामीणों का कहना है कि अनूपपुर जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद औद्योगिक विकास की दृष्टि से अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाया है। ऐसे में अदाणी समूह की प्रस्तावित थर्मल परियोजना क्षेत्र में औद्योगिक विकास की नई दिशा प्रदान कर सकती है।विकास और रोजगार के बीच संतुलित दृष्टिकोण की अपेक्षाग्रामीणों ने कहा कि वे क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद के साथ परियोजना को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि परियोजना पर्यावरणीय मानकों, स्थानीय हितों और पारदर्शी संवाद की भावना के साथ आगे बढ़ती है, तो यह अनूपपुर जिले के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति प्रदान कर सकती है।मझौली और आसपास के कई ग्रामीणों का कहना है कि वे जनसुनवाई प्रक्रिया का स्वागत कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार, व्यापार, आधारभूत सुविधाओं और समग्र विकास के नए द्वार खुलेंगे, जिससे गांवों को शहरों के समान सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।
