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चचाई–विवेक नगर मार्ग पर मौत बनकर खड़े दो पेड़, लापरवाही की कीमत चुका रहे राहगीर संकेतक नहीं, बेरिकेडिंग नहीं, कटिंग नहीं—प्रशासन की उदासीनता से बढ़ता जा रहा मौत का ग्राफ

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चचाई (अनूपपुर)।चचाई से विवेक नगर को जोड़ने वाला मार्ग इन दिनों राहगीरों के लिए नहीं बल्कि मौत का न्योता बनता जा रहा है। सड़क किनारे खड़े दो विशाल पेड़, जो किसी यमराज की तरह यात्रियों की जान लेने के लिए हर समय तैयार खड़े हैं, प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुके हैं।इन पेड़ों के कारण इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। न तो यहां कोई चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं, न बेरिकेडिंग, और न ही अब तक पेड़ों की कटिंग या सड़क का समतलीकरण किया गया है। नतीजा—हर कुछ दिनों में कोई न कोई परिवार अपना चिराग खो रहा है।बीती रात एक और दर्दनाक हादसा इस लापरवाही की गवाही बन गया। शहडोल की ओर जा रही एक स्विफ्ट डिज़ायर कार अनियंत्रित होकर सीधे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन चालक की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।स्थानीय विवेक नगर के निवासियों का कहना है कि वे इस खतरे को लेकर कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं। मांग साफ़ थी—➡️ दोनों पेड़ों को हटाया जाए➡️ सड़क का समतलीकरण किया जाए➡️ दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित कर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं लेकिन अफ़सोस, जिम्मेदारों ने जैसे आंखें मूंद रखी हैं।प्रश्न यह है कि कितनी और जानें जाएंगी, तब प्रशासन जागेगा?कितने घरों के दीप बुझने के बाद यह मार्ग सुरक्षित बनेगा?आज यह मार्ग सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि लापरवाही का स्मारक बन चुका है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह मौतों का आंकड़ा और भयावह हो सकता है।अब जरूरत है कि प्रशासन कागज़ी कार्रवाई से बाहर निकलकर तत्काल ज़मीनी स्तर पर निर्णय ले, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस दर्द से न गुज़रे।

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