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धमाके, डर और आंदोलन: छतई अडानी पावर के खिलाफ सड़कों पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन की भूमिका सवालों में

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अनूपपुर। जिले के बिजुरी थाना क्षेत्र में स्थित अडानी पावर लिमिटेड छतई परियोजना इन दिनों भारी विवादों में घिरी हुई है। यहां हो रही हैवी ब्लास्टिंग को लेकर आसपास के गांवों में डर, गुस्सा और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि कंपनी खुलेआम नियम-कानूनों को ताक पर रखकर ऐसी ब्लास्टिंग कर रही है, जिससे आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। धमाकों की आवाज और जमीन में तेज कंपन से लोग दहशत में हैं, वहीं पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।ग्रामीणों के अनुसार उमरदा, मंटोलिया और मझौली गांव ब्लास्टिंग स्थल से बेहद करीब बसे हुए हैं। रोजाना हो रहे तेज धमाकों से घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं, छतें हिल रही हैं और बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं में डर का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद न तो कंपनी सुन रही है और न ही प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है।ग्रामीणों ने अडानी पावर प्रबंधन और ठेकेदारों पर स्थानीय मजदूरों के शोषण के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि उनसे 8 घंटे की जगह 12-12 घंटे तक काम लिया जा रहा है, लेकिन मजदूरी शासन की गाइडलाइन के मुताबिक नहीं दी जा रही। कई स्थानीय लोगों को काम से हटा दिया गया है, जिससे गांवों में बेरोजगारी बढ़ गई है। मजदूरों का यह भी आरोप है कि ठेकेदार उनसे बदतमीजी करते हैं और विरोध करने पर काम से निकालने की धमकी दी जाती है।इन तमाम समस्याओं से परेशान होकर उमरदा, मंटोलिया और मझौली गांवों के ग्रामीण एकजुट हो गए और आंदोलन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक हैवी ब्लास्टिंग बंद नहीं होती और मजदूरों को उनका हक नहीं मिलता, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। आंदोलन की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और स्थिति को संभालने के लिए मौके पर तहसीलदार कोतमा के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया।ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी घनी आबादी वाले इलाके में इतनी खतरनाक ब्लास्टिंग की अनुमति किसने दी। लोगों का आरोप है कि प्रशासन आंख मूंदकर बैठा हुआ है और कंपनी को खुली छूट दी जा रही है। अब तक न तो ब्लास्टिंग के मानकों की जांच हुई और न ही मजदूर शोषण के मामलों में कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभागों ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनकी मांग है कि पर्यावरण नियमों की निष्पक्ष जांच हो, ब्लास्टिंग के तय मानकों का पालन कराया जाए और स्थानीय लोगों की सुरक्षा व रोजगार को प्राथमिकता दी जाए, ताकि गांवों में फिर से सामान्य और सुरक्षित जीवन लौट सके।

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