
कोतमा, (मध्यप्रदेश)कोतमा में आयोजित गीता जयंती कार्यक्रम को शासकीय कैलेंडर में शामिल किए जाने के बावजूद, इस आयोजन के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह कार्यक्रम नगर पालिका के द्वारा आयोजित किया जाना था लेकिन इस कार्यक्रम को एक व्यक्तिगत आयोजन का रूप ले चुका था और उसी के द्वारा इस कार्यक्रम को संचालित किया गया जिसमें आम नगरवासियों की भागीदारी शून्य कर दी गई, वहीं दूसरी ओर, मॉडल स्कूल की सैकड़ों छात्राओं को कार्यक्रम स्थल पर तीन घंटे तक कड़ी धूप में बैठने को मजबूर किया गया।एवम मंच में बैठे लोगों को टेंट लगाकर गद्दीदार कुर्सी भेंट की गई थी!*सार्वजनिक कार्यक्रम पर ‘निजी’ नियंत्रण के आरोप*गीता जयंती जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कार्यक्रम को शासकीय स्तर पर आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना होता है। हालांकि, शिकायतें मिली हैं कि आयोजकों ने जानबूझकर नगर के आम लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों को कार्यक्रम से दूर रखा।नगर के एक जागरूक नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह कार्यक्रम घोषित रूप से शासकीय था, फिर भी इसे कुछ विशेष लोगों के बीच सीमित रखा गया। ऐसा लगा जैसे यह कोई सार्वजनिक समारोह न होकर, कुछ गिने-चुने लोगों का निजी कार्यक्रम है। जब शासकीय कार्यक्रम होता है, तो नगर के हर व्यक्ति को उसमें शामिल होने का अधिकार होता है।एवम कार्यक्रम के मंच पर नगर पालिका परिषद का बैनर लगा हुआ था और व्यक्तिगत कार्यक्रम को शासकीय बैनर के तले संचालित किया गया!*छात्राओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़: तीन घंटे धूप में बैठाया*कार्यक्रम के सबसे निंदनीय पहलू में, मॉडल स्कूल की छात्राओं को कार्यक्रम स्थल पर बिना किसी पर्याप्त छाया या सुविधा के लंबे समय तक धूप में बैठने के लिए बाध्य किया गया।बताया जाता है कि छात्राओं को सुबह जल्दी कार्यक्रम स्थल पर लाया गया और उन्हें आयोजकों या अतिथियों के आने के इंतजार में करीब तीन घंटे तक सीधे सूर्य के प्रकाश में बैठना पड़ा। गर्मी और धूप की तीव्रता को देखते हुए यह कदम मानवीय संवेदनशीलता की घोर अनदेखी को दर्शाता है।एक अभिभावक ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा, “बच्चों को इस तरह की असुविधाजनक स्थिति में बैठाना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना है। कार्यक्रम की व्यवस्था सुनिश्चित करना आयोजकों की जिम्मेदारी है। क्या बच्चों के स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण अतिथियों का इंतज़ार था?”जवाबदेही पर उठे सवालयह घटना शासकीय आयोजनों के प्रबंधन, पारदर्शिता और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाती है।*स्थानीय प्रशासन को अब इन आरोपों की जाँच करनी होगी किशासकीय कार्यक्रम को व्यक्तिगत रूप क्यों दिया गया*नगर के आम लोगों की भागीदारी क्यों सीमित की गई?मॉडल स्कूल की छात्राओं को, जो अल्पसंख्यक थीं, उन्हें तीन घंटे तक धूप में क्यों बैठाया गया और जिम्मेदार शिक्षा या प्रशासनिक अधिकारी कौन थे?नगर वासियों ने जिला कलेक्टर से इस पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लेने और कार्यक्रम के आयोजन में हुई अनियमितताओं तथा बच्चियों के प्रति की गई लापरवाही के लिए दोषी अधिकारियों और आयोजकों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।कार्यक्रम में उपस्थित नगर पालिका अध्यक्ष भाजपा,नगर मंडल अध्यक्ष, वार्ड पार्षद एवम मॉडल स्कूल के प्राचार्य एवम गिनती के तीन अन्य लोग उपस्थित थे! *नगर के पुरोहितों को गीता जयंती कार्यक्रम से रखा गया दूर*मॉडल स्कूल में आयोजित गीता जयंती के कार्यक्रम को व्यक्तिगत कार्यक्रम होने के कारण नगर के पूज्य पुरोहितों का एवं वरिष्ठ जनों को इस कार्यक्रम से दूर रखा गया सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक और प्रदेश के मुखिया इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है वही कोतमा नगर में इस कार्यक्रम से आयोजक मंडल के द्वारा नगर के लोगों से दूरियां बनाई गई आखिर इस तरह की विसंगतियां क्यों? आयोजित कार्यक्रम के बारे में मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रदीप झारिया से पूछे जाने पर यह बताया गया है कि कार्यक्रम का आयोजक नगर पालिका परिषद है लेकिन इसे व्यक्तिगत कैसे बना दिया गया मुझे इसकी जानकारी नहीं है रही बात लोगों को आमंत्रित करने की तो हम सभी को आमंत्रित नहीं कर सकते एक-एक व्यक्ति को आमंत्रित करना हमारा काम नहीं है!!



