• Thu. Jan 15th, 2026

News Junction MP Chhattisgarh

India #1 News Platform

अदानी पावर प्लांट में हड़कंप—गौतम अडानी के नाम पर ठेका कंपनियों की तानाशाही, मजदूरों का गुस्सा फूटा

Oplus_16908288
Spread the love

अदानी पावर प्लांट परियोजना को लेकर कोतमा तहसील अंतर्गत छातई–मझौली क्षेत्र में स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों में असंतोष तेजी से बढ़ता जा रहा है। 3200 मेगावाट क्षमता वाली इस विशाल विद्युत परियोजना की शुरुआत के साथ ही भूमि समतलीकरण और मशीनों की आमद शुरू हो चुकी है। प्रारंभिक चरण में ही मजदूरों और आसपास की जनता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्लांट में ठेका कंपनियों द्वारा मनमानी, तानाशाही और शोषण की स्थिति लगातार बढ़ रही है।स्थानीय मजदूरों ने बताया कि वे प्रतिदिन तय समय से अधिक काम करने को बाध्य हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता। मजदूरी भी कंपनी एक्ट में निर्धारित मानकों से कम दी जा रही है। कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरणों, प्राथमिक उपचार किट, स्वास्थ्य सुविधाओं, शुद्ध पेयजल और नियमानुसार अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव है। मजदूरों ने कहा कि ठेका कंपनियाँ इतनी मनमानी पर उतर आई हैं कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की है कि प्लांट में रॉ मैटेरियल सप्लाई करने वाले भारी वाहन निर्धारित गति सीमा से कहीं ज्यादा तेज़ रफ्तार से चल रहे हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिससे स्थानीय लोगों में असुरक्षा और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।अदानी पावर प्लांट की स्थापना के दौरान हुई जनसुनवाई में कंपनी द्वारा स्थानीय युवाओं को रोजगार, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े अनेक वादे किए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से कोई भी वादा जमीनी स्तर पर लागू होता नहीं दिख रहा है। युवाओं ने आरोप लगाया कि रोजगार की जो आशा पनपी थी, वह अब धूमिल हो रही है। जो लोग काम पर लगे हैं, वे शोषण और मनमानी के कारण बेहद नाराज हैं।ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उनका गुस्सा गौतम अडानी पर इसलिए निकाला जा रहा है क्योंकि परियोजना का नाम उन्हीं से जुड़ा है, जबकि असल समस्या ठेका कंपनियों और स्थानीय प्रबंधन की लापरवाही से पैदा हो रही है। लोगों का आरोप है कि प्लांट के जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्र की समस्याओं को लेकर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं और मजदूरों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।स्थानीय निवासियों ने चिंता जताई कि यदि अभी से यह स्थिति है, तो आने वाले समय में प्लांट में लगभग तीन हजार बाहरी मजदूरों की आमद के बाद हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएँ और कम हो जाएँगी तथा क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि ठेका कंपनियों की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए, मजदूरों को नियमों के अनुरूप वेतन और सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ, सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए। समुदाय का कहना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो विरोध और तेज हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *