अमरकंटक ( उमाशंकर पाण्डेय मुन्नू संवाददाता)देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन पर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 4:25 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी को शाम 5:10 बजे तक रहेगी।प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार, रात्रि में चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत एवं पूजन किया जाएगा। इस दिन जलाभिषेक और रात्रिकालीन चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है।अमरकंटक में विशेष आयोजनपवित्र नगरी अमरकंटक के प्रमुख शिवालयों में 15 फरवरी की संध्या से ही विशेष पूजन-अर्चन आरंभ हो जाएगा। श्रद्धालु दिनभर भगवान शिव को नर्मदा जल अर्पित करेंगे और रात्रि में चारों पहर रुद्राभिषेक करेंगे।धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था। शिव महापुराण में वर्णित है कि प्रदोष काल में शिव आराधना करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।पूजन सामग्री का महत्वमहाशिवरात्रि पर भगवान शिव को दूध, दही, घी, मधु, शक्कर, भांग, धतूरा, भस्म, बेलपत्र, धूप-दीप एवं नैवेद्य अर्पित करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। श्रद्धा भाव से किया गया जलाभिषेक सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।चार प्रहर की पूजा का विधानशास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात्रि में चारों पहर पूजा करने का विशेष महत्व है—प्रथम प्रहर (शाम 6:00 बजे से) – दूध से रुद्राभिषेकद्वितीय प्रहर – दही से रुद्राभिषेकतृतीय प्रहर – घी से रुद्राभिषेकचतुर्थ प्रहर – मधु से रुद्राभिषेकचारों प्रहर की पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।महाशिवरात्रि आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक जागरण का दिव्य पर्व है। इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।हर-हर महादेव! 🔱
महाशिवरात्रि 2026: 15 फरवरी की शाम 4:25 बजे से शुभ मुहूर्त, चारों पहर होगी विशेष पूजा| विशेष लेख – पंडित संदीप ज्योतिषी
