शहडोलझींक बिजुरी इलाके में इन दिनों एक फर्जी बंगाली डॉक्टर का काला कारनामा धड़ल्ले से चल रहा है। मंजू श्री मेडिकल स्टोर के नाम पर पहले दवाइयों की दुकान खोली गई और फिर उसी की आड़ में मेडिकल स्टोर के पीछे घर में पूरा का पूरा अवैध अस्पताल खड़ा कर दिया गया। न कोई बोर्ड, न कोई रजिस्ट्रेशन, न कोई डिग्री… लेकिन इलाज ऐसे करता है जैसे किसी बड़े अस्पताल का डॉक्टर हो।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तथाकथित बंगाली डॉक्टर वर्षों से यहां भोले-भाले ग्रामीणों और गरीब आदिवासियों को अपने मीठे बोल और झूठे भरोसे में फंसाकर इलाज कर रहा है। बुखार हो या पेट दर्द, जख्म हो या बड़ी बीमारी – हर मर्ज की एक ही दवा और वह भी दुगने दामों पर। दवाइयों के नाम पर मनमाने रेट वसूले जाते हैं, न बिल मिलता है और न ही किसी तरह की जानकारी।हद तो तब हो जाती है जब बिना किसी जांच, बिना एक्स-रे या रिपोर्ट के ऑपरेशन तक कर दिए जाते हैं। मरीज और उसके परिजनों को यह तक नहीं बताया जाता कि बीमारी क्या है और इलाज किस तरह का किया जा रहा है। कई बार मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे चुपचाप कहीं और भेज दिया जाता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब झींक बिजुरी में करोड़ों की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है, जहां डॉक्टर, नर्स और स्टाफ की पूरी व्यवस्था है, तब आखिर ग्रामीण इस फर्जी डॉक्टर के चक्कर में क्यों पड़ रहे हैं? ग्रामीणों का कहना है कि झूठे दावे, तुरंत इलाज का लालच और सरकारी अस्पताल से डर दिखाकर उन्हें बहकाया जाता है।गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ निर्देश दे रखे हैं कि प्रदेश में कोई भी फर्जी या झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक नहीं चला सकता। इसके बावजूद जीत बिजली में खुलेआम यह अवैध धंधा चलना यह दिखाता है कि या तो जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं या फिर मिलीभगत से सब कुछ हो रहा है।ग्रामीणों में अब इस बात को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करे, अवैध अस्पताल को सील करे और फर्जी बंगाली डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि गरीब आदिवासियों की जिंदगी से आगे कोई खिलवाड़ न कर सके।



