अनूपपुर (मध्यप्रदेश)जिले में Group-D पदों पर चल रही आउटसोर्स भर्ती अब एक संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क के रूप में सामने आ रही है। बेरोज़गार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर 50,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। यह भर्ती प्रक्रिया CEDMAP के माध्यम से आउटसोर्स की जा रही है, जिसमें कथित रूप से एजेंसी, स्वास्थ्य विभाग के बाबू और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों तक की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन भय और दबाव के कारण कोई भी अभ्यर्थी सामने आने की हिम्मत नहीं कर पा रहा।—“पैसा दो, नाम जोड़ो” – चयन सूची पहले, इंटरव्यू बाद में?अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन की प्रक्रिया योग्यता और पारदर्शिता के बजाय लेन-देन पर आधारित हो गई है। जिन अभ्यर्थियों ने मोटी रकम दी, उनके नाम चयन सूची में स्वतः शामिल कर लिए गए, जबकि योग्य और प्रशिक्षित बेरोज़गार केवल इसलिए बाहर हो गए क्योंकि वे पैसे नहीं दे सके।कुछ युवाओं ने यह भी बताया कि—पहले “सेटिंग” कराई जाती हैफिर चयन सूची में नाम आता हैप्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैयह स्थिति सीधे-सीधे भर्ती नियमों और सरकारी मंशा पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।—1 साल की संविदा, कभी भी हटाने का अधिकार—फिर भी लाखों की वसूलीसबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह पूरी भर्ती केवल 1 वर्ष की निविदा/संविदा पर आधारित है।इसमें—कोई स्थायी नौकरी नहींकोई भविष्य की सुरक्षा नहींठेकेदार को कभी भी हटाने का अधिकारइसके बावजूद बेरोज़गारों से जीवन भर की कमाई के बराबर रकम मांगी जा रही है।यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बेरोज़गारी की मजबूरी को लूट का माध्यम बना लिया गया है।—न नकद का हिसाब, न रसीद—पूरी तरह अघोषित लेन-देनसूत्र बताते हैं कि अधिकतर मामलों में—पैसे नकद लिए गएकोई रसीद नहीं दी गईबातचीत मौखिक रखी गईमोबाइल पर बात करने से बचा गयाइससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि पूरा लेन-देन जानबूझकर काले तरीके से किया गया, ताकि भविष्य में कोई सबूत न बचे।—डर का माहौल: “शिकायत करोगे तो कहीं नौकरी नहीं मिलेगी”कई अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर कोई आवाज़ उठाता है तो उसे—भविष्य में किसी भी आउटसोर्स भर्ती से बाहर रखने“ऊपर तक पकड़” होने की धमकीमानसिक दबावजैसी बातें कही जाती हैं।इसी कारण अधिकांश पीड़ित चुप हैं और सिस्टम निर्भीक होकर चलता जा रहा है।—प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवालअब सबसे अहम प्रश्न यह है कि—क्या जिला प्रशासन को इस पूरे मामले की जानकारी नहीं?अगर जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या आउटसोर्स के नाम पर विभागीय जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा जा रहा है?जब भर्ती सरकारी विभाग में हो रही है, तो नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी से प्रशासन कैसे बच सकता है?—यदि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, सामाजिक अपराध हैयह मामला केवल घूसखोरी तक सीमित नहीं है।यह—बेरोज़गार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़सरकारी व्यवस्था पर विश्वास को तोड़ने वालासामाजिक असंतोष को जन्म देने वालाअपराध है।—मांगें तेज़, सवाल सीधेअब बेरोज़गार युवाओं और जागरूक नागरिकों की ओर से मांग उठ रही है कि—1. Group-D भर्ती की पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए2. CEDMAP और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए3. अवैध वसूली के आरोपों पर एफआईआर दर्ज हो4. चयन सूची, मापदंड और भुगतान प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए5. पीड़ित अभ्यर्थियों को सुरक्षा और गोपनीयता दी जाए—अब भी समय हैयदि प्रशासन समय रहते इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता, तो यह मामला आने वाले समय में बड़ा जन आंदोलन और विश्वसनीयता संकट का रूप ले सकता है।अनूपपुर के बेरोज़गार युवा जवाब चाहते हैं—नौकरी या लूट?सेवा या सौदा?
