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जिले में हेलमेट पहनने को लेकर यातायात विभाग का जागरूकता अभियान तेज नियम नहीं, जीवन रक्षक है हेलमेट—यातायात विभाग

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अनूपपुर। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए यातायात विभाग द्वारा आम नागरिकों से हेलमेट पहनने की लगातार अपील की जा रही है। यातायात प्रभारी विनोद दुबे ने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जान की सुरक्षा करना है। उन्होंने बताया कि हेलमेट पहनना सिर्फ कानून की मजबूरी नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वयं की और उसके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है।यातायात प्रभारी ने जानकारी दी कि जिले में लोगों को जागरूक करने के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गांव-गांव, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोगों को हेलमेट के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक सभी को यह समझाया जा रहा है कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना कितना आवश्यक है।उन्होंने बताया कि अधिकतर सड़क हादसे छोटी दूरी तय करते समय ही होते हैं, क्योंकि लोग यह सोचकर हेलमेट नहीं पहनते कि थोड़ी ही दूर जाना है। जबकि दुर्घटना किसी समय और किसी स्थान पर हो सकती है। ऐसे में हेलमेट ही एकमात्र ऐसा साधन है, जो गंभीर सिर की चोट से बचाकर जीवन की रक्षा कर सकता है।यातायात प्रभारी विनोद दुबे ने कहा कि कोई भी व्यक्ति सड़क पर अकेले नहीं चलता, उसके पीछे उसका पूरा परिवार होता है, जो घर पर उसके लौटने का इंतजार करता है। माता-पिता, पत्नी, बच्चे और परिजन सभी किसी न किसी रूप में उस व्यक्ति से जुड़े रहते हैं। ऐसे में हेलमेट न पहनना केवल अपनी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सुरक्षा को खतरे में डालना है। उन्होंने आमजन से अपील की कि अपने अपनों के लिए हेलमेट जरूर पहनें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।उन्होंने यह भी बताया कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी की जा रही है। बार-बार समझाने के बाद भी जो लोग बिना हेलमेट वाहन चलाते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि सड़क पर अनुशासन बना रहे और दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।यातायात विभाग ने आम नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील की है ताकि सड़क सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता और अधिक व्यापक स्तर पर फैल सके। विभाग का मानना है कि जब तक समाज मिलकर इस दिशा में प्रयास नहीं करेगा, तब तक सड़क दुर्घटनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है।

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