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जमुना कोतमा में बिजली कटौती से जनता त्रस्त, प्रबंधन की हठधर्मिता पर भड़के अध्यक्ष

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कोतमाअनूपपुर जिले के जमुना कोतमा क्षेत्र में कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के प्रबंधन द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ बिजली कटौती से आम जनता त्रस्त हो चुकी है। खासकर नगर पालिका पसान क्षेत्र में लगातार हो रही इस कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली के बिना लोग बेहाल हैं, और खास तौर पर सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब, मजदूर और आदिवासी समुदाय के लोग इस मार को सबसे ज्यादा झेल रहे हैं, जहां नगर पालिका की बिजली व्यवस्था अभी तक पहुंच नहीं पाई है।नगर पालिका अध्यक्ष राम अवध सिंह ने इस मसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कोलरी प्रबंधन से एक महीने का समय देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रबंधन की ओर से बिजली कटौती का यह रवैया किसी “हिटलरशाही” से कम नहीं है। राम अवध सिंह ने बताया कि उन्होंने जमुना कोतमा क्षेत्र के महाप्रबंधक अजय कुमार सिंह और विद्युत यांत्रिकी अधिकारी शिवदयाल से इस बारे में बात की। अजय कुमार सिंह ने तर्क दिया कि एसईसीएल के कर्मचारी कम बचे हैं, बिजली की खपत ज्यादा हो रही है, और ऊपर से हेडक्वार्टर और विजिलेंस का दबाव है, जिसके चलते बिजली कटौती की जा रही है। लेकिन राम अवध सिंह का कहना है कि यह तर्क जनता की परेशानी का समाधान नहीं है।नगर पालिका की मांग: “एक महीने का समय दो, बिजली कटौती बंद करो”राम अवध सिंह ने प्रबंधन से साफ-साफ कहा कि मुख्य सड़कों पर जल रही स्ट्रीट लाइट्स को जलने दिया जाए और उन वार्डों में, जहां अभी बिजली नहीं पहुंची है, वहां ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली की व्यवस्था की जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि नगर पालिका और एमसीबी (मल्टी-सर्किट ब्रेकर) के सहयोग से एक महीने के भीतर सभी वार्डों में ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली पहुंचा दी जाएगी। लेकिन प्रबंधन, खासकर महाप्रबंधक अजय कुमार सिंह, इस मांग को मानने को तैयार नहीं हैं और अपनी हठधर्मिता पर अड़े हुए हैं।राम अवध सिंह ने कोलरी प्रबंधन से अपील की है कि कम से कम एक महीने के लिए बिजली कटौती पर रोक लगाई जाए, ताकि जनता को इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि कोई भी नागरिक इस गर्मी में बिजली के बिना तड़पे। प्रबंधन को चाहिए कि वह जनता की परेशानी को समझे और मानवीय दृष्टिकोण अपनाए।”लोगों में आक्रोश, प्रबंधन पर “मुंहदेखी” का आरोप स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत यांत्रिकी अधिकारी शिवदयाल द्वारा “मुंहदेखी” के आधार पर बिजली कटौती की जा रही है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग, जो पहले से ही सीमित संसाधनों के बीच जीवन बिता रहे हैं, इस कटौती से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई लोगों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि प्रबंधन की इस “हिटलरशाही” पर लगाम लग सके।क्या है आगे की राह?नगर पालिका अध्यक्ष राम अवध सिंह ने भरोसा दिलाया है कि वे जनता की इस समस्या को हल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि अगर प्रबंधन एक महीने का समय दे, तो नगर पालिका सभी जरूरी इंतजाम कर लेगी। लेकिन अगर प्रबंधन अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।इस पूरे मामले ने जमुना कोतमा क्षेत्र में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रबंधन जनता की इस पुकार को सुनेगा या अपनी मनमानी जारी रखेगा।

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